Monday, October 12, 2015

दुनिया में रामायण के करीब तीन हजार अनुवाद

दुनिया में अब तक विभिन्न भाषाओं में रामायण के करीब तीन हजार से अधिक अनुवाद हो चुके हैं और उनमें से कइयों की कथाएं मूल रामायण से अलग हैं।  मलयालम के प्रसिद्ध कवि तथा जाने माने अनुवादक डॉ. के. सच्चिदानंदन ने नई दिल्ली में भारतीय भाषाओं के अनुवाद पर आयोजित एक संगोष्ठी के उद्घाटन भाषण में यह बात कही ।

देश में 3०० तरह के रामायण लिखे गए 

    डॉ.सच्चिदानंदन ने कहा कि कन्नड़ के मशहूर लेखक एके रामानुजन ने देश में 3०० तरह के रामायण लिखे जाने की बात कही थी, जिनको लेकर वह कुछ साल पहले विवादों में भी घिरे थे और उन्हें बदनामी भी मिली थी, पर यह सच है कि रामायण के करीब तीन हजार से अधिक रूप मौजूद हैं। ये अनुवाद के कारण ही संभव हो पाया है। देश की विभिन्न भाषाओं में रामायण के अनुवादकों ने वाल्मीकि रामायण की कथा में काफी परिवर्तन किया है और छूट भी ली है, जिसके कारण कई बार यह कथा मूल कथा से नितांत अलग हो गयी है। किसी रामायण में सीता रावण की बहन है तो किसी किसी रामायण में रावण से लक्ष्मण लड़ते हैं ।

एक अनुवादक को फांसी भी दे दी गयी

   उन्होंने कहा कि अनुवाद दरअसल एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और यही कारण है कि उसमें विविधताएं काफी हैं। लेकिन गलत अनुवाद पर दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया भी हुई हैं। प्लेटो के गलत अनुवाद के लिए उसके एक अनुवादक को फांसी भी दे दी गयी थी । डॉ.सच्चदानंदन ने कहा कि अनुवाद के कारण ही दुनिया की विभिन्न सभ्यताएं और संस्कृतियां एक दूसरे से जुड़ी और विभिन्न आन्दोलनों के बारे में एक दूसरे को जानकारियां मिलीं। दलित आन्दोलन, स्त्री आन्दोलन भी अनुवाद के कारण चर्चित हुए ।

अनुवाद में  है की कितनी ताकत 

    प्रसिद्ध गांधीवादी लेखक अनुपम मिश्र ने बताया कि उन्होंने कुछ साल पहले पानी की समस्या पर ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ पुस्तक लिखीं थी जिसके अब तक 5० अनुवाद हो चुके हैं। यहां तक कि फ्रेंच भाषा में भी उसके अनुवाद हुए और अरबी भाषा में भी हो रहा है । मोरक्को के सुल्तान तक वह किताब पहुंच चुकी है। इससे पता चलता है कि अनुवाद की कितनी ताकत है ।  अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका नमिता गोखले ने कहा कि देश में 22 भारतीय भाषाएं, 122 क्षेत्रीय भाषा तथा एक हजार से अधिक बोलियां हैं। इतनी सारी भाषाओं और बोलियों में अनुवाद की गुजायश है और इससे भारत की सांस्कृतिक एकता एवं विविधता का पता चलता है ।

No comments: