Sunday, October 11, 2015

नेट निरपेक्षता से डिजिटल इंडिया को सफल बनाने में मिलेगी मदद

नेट निरपेक्षता (नेट न्यूट्रेलिटी) को लेकर जारी बहस के बीच दूरसंचार विभाग द्वारा इस पर गठित समिति की एक नोट में कहा गया है कि इससे डिजिटल इंडिया अभियान को सफल बनाने के साथ इससे समानता सुनिश्चित करने और समग्र विकास में मदद मिलेगी। 
आम लोग जहां इंटरनेट की आजादी चाहते हैं, वहीं दूरसंचार कंपनियां निशुल्क ऐप का उपयोग करने पर डाटा टैरिफ के  अलावा अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने पर जोर दे रही है। नेट न्यूट्रेलिटी का अर्थ है इंटरनेट सेवा प्रदाता इंटरनेट के सभी ट्रैफिक को एक समान मानेंगे और फिलहाल ऐसी ही सुविधा है, लेकिन व्हाट्सऐप, स्काइप और फेसबुक जैसे ऐप के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर सेवा प्रदाताओं ने सामान्य डाटा शुल्क के अतिरिक्त दूसरे ऐप के उपयोग के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने की तैयारियां की है, जिसका लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। दूरसंचार नियामक ट्राई ने इस पर संबद्ध पक्षों से सुझाव मांगे है। ट्राई के पास इसके विरोध में लाखों में सुझाव आ चुके हैं। 
   केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मसले पर सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस समिति की हाल में हुई दूसरी बैठक के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा तैयार नोट में कहा गया कि नेट न्यूट्रेलिटी से न/न सिर्फ डिजिटल इंडिया अभियान को सफल बनाने में मदद मिलेगी बल्कि यह इंटरनेट के उपयोग में समानता लाने और समग्र विकास में भी मददगार होगा। 
    इस समिति में दूरसंचार विभाग के लाइर्सेंंसग एवं वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पदाधिकारी शामिल हैं। इस समिति को अगले महीने के दूसरे सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी है।  बैठक के लिए जारी इस नोट में कहा गया कि देश में इंटरनेट के कम पहुंच के मद्देनजर दूरसंचार विभाग नेट न्यूट्रेलिटी पर जोर दे रहा है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा इंटरनेट उपभोक्ता देश है, लेकिन इंटरनेट पहुंच के मामले में यह दुनिया के 1० देशों में निचले पायदान पर है। नोट में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि किफायती उच्च गुणवत्ता के इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवा से आर्थिक और सामाजिक विकास को बल मिलेगा।
   दूरसंचार विभाग ने इसमें कहा है कि हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन में 1० फीसदी की वृद्धि होने से आर्थिक विकास में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। यह भी कहा गया है कि नए कारोबार शुरू करने वालो के विकास में इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां सभी को एक समान मंच मिलता है।
   नोट में कहा गया कि डिजिटल इंडिया अभियान के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत है। राष्ट्रीय टेलीकॉम नीति 2०12 के तहत वर्ष 2०15 तक मांग पर किफायती एवं भरोसेमंद ब्रॉडबैंड सेवा देने की बात कही गयी। इसमें वर्ष 2०17 तक 175 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया। यह भी कहा गया है कि सरकार टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर वेब अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है।
        दूरसंचार सेवाएं देने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी भारती एयरटेल ने एयरटेल जीरो और फेसबुक ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ मिलकर इंटरनेट डॉट ओआरजी नाम से प्लेटफॉर्म लांच किए हैं। इंटरनेट डॉट ओआरजी पर करीब तीन दर्जन वेबसाइट हैं। उनमें से अधिकांश कंटेंट प्रदाता है। भारत में विशेषकर सोशल मीडिया पर इंटरनेट डॉट ओआरजी तथा एयरटेल जीरो जैसे प्लेटफॉर्म की पहल को नेट निरपेक्षता के खिलाफ बताते हुए आलोचना हो रही है।
   इस बीच सोशल मीडिया नेटवर्क लोकल सर्कल्स ने नेट न्यूट्रेलिटी पर एक सर्वेक्षण किया है, जिसमें भाग लेने वाले 77 प्रतिशत लोगों ने सरकार से इंटरनेट की आजादी और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया है। इतने ही प्रतिशत लोगों ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार और ट्राई ने उपभोक्ताओं के हितों विशेषकर कॉल ड्रॉप और कमजोर डाटा सेवा से निजात दिलाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं। इस सर्वेक्षण में छह सवाल पूछे गए थे, जिनका 2० हजार से 377०० लोगों ने जबाव दिया है।
   फेसबुक के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि सार्वभौम संपर्कता (यूनिवर्सल कनेक्टिविटी) तथा नेट न्यूट्रेलिटी ‘साथ-साथ बनी रह सकती है’ और इसे बने रहना होगा। इसके साथ ही उन्होंने इन आलोचनाओं को खारिज किया है कि इंटरनेट डॉट ओआरजी द्वारा कुछ सेवाओं की नि:शुल्क पेशकश नेट निरपेक्षता के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।
  नेट निरपेक्षता से आशय इंटरनेट के सारे ट्रैफिक से समान व्यवहार करना है। किसी कंपनी या ऐप को भुगतान के आधार पर प्राथमिकता देना इस अवधारणा का उल्लंघन माना जाएगा। बढ़ती बहस के बीच उक्त दोनों प्लेटफॉर्म के कई सहयोगी पहले ही दूरी बना चुके हैं, जिनमें फ्लिपकार्ट ने एयरटेल जीरो से तथा क्लियरट्रिप, टाइम्स ग्रुप तथा एनडीटीवी ने इंटरनेट डॉट ओआरजी से दूरी बना ली है।   
नेट निरपेक्षता का समर्थन करते हुए जुकरबर्ग ने कहा है कि ‘‘हम नेट निरपेक्षता का पूरा समर्थन करते हैं। हम चाहते हैं कि इंटरनेट खुला रहे। नेट निरपेक्षता से यह सुनिश्चित होता है कि नेटवर्क कंपनियां आपको मिलने वाली सेवाओं को सीमित कर कोई भेदभाव नहीं कर पाएं। यह मुक्त इंटरनेट के लिए जरूरी है और हम इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’’
   नेट निरपेक्षता को लेकर विवादों के घेरे में आई भारती एयरटेल ने भी कहा कि वह सभी वेबसाइटों एवं एप्लिकेशंस के साथ समान व्यवहार करेगी, बेशक वे उसके टोल फ्री प्लेटफॉर्म पर हैं या नहीं, पिछले सप्ताह पेश एयरटेल-जीरो एक खुला मंच है, जिसमें उपभोक्ताओं को कुछ मोबाइल ऐप्स तक मुफ्त में पहुंच की सुविधा होती है। इसके शुल्क का बोझ ऐप बनाने वाली कंपनियां उठाती हैं।
   एयरटेल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (भारत तथा दक्षिण एशिया) गोपाल विट्टल ने कर्मचारियों को भेजे पत्र में कहा है कि ‘‘पिछले कुछ दिनों के दौरान आपको एयरटेल जीरो पर काफी बहस देखने को मिली है। इसे ऐसे पेश किया जा रहा है कि जैसे हम नेट निरपेक्षता का उल्लंघन कर रहे हैं। हम मीडिया और सोशल मीडिया में इस बारे में कुछ हलकों से भेजी जा रही गलत सूचनाओं को लेकर्र ंचतित हैं। मैं इस अवसर का लाभ स्थिति साफ करने के लिए उठाना चाहता हूं। हम नेट निरपेक्षता के पक्ष में है।’’

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