Sunday, August 19, 2018

देवानंद ने नीरज को दिया था फिल्‍मों में ब्रेक

देवानंद ने नीरज को पहली बार मुंबई में एक कवि सम्मेलन में सुना था। उन्होंने नीरज से कहा कि मुझे आपकी भाषा पसंद आई। किसी दिन हम साथ मे काम करेंगे। फिर कभी 60 के दशक के अंत में जब नीरज को पता चला कि देवानंद 'प्रेम पुजारी' नाम की एक फिल्म बनाने जा रहे हैं तो नीरज ने उन्हें एक खत लिखा और उनके वादे की याद दिलाई। देवानंद ने उन्हें मुंबई बुलाया। उनके आने पर, देवानंद ने उन्हें 1000 रुपये दिए और उनसे कहा कि मैं कल आपको अपने संगीत निर्देशक एसडी बर्मन के पास ले चलूंगा।

अगले दिन जब वे एसडी बर्मन के पास पहुंचे, तो बर्मन ने नीरज को बताया कि वे एक गाना चाहते हैं जो 'रंगीला' शब्द से शुरू हो. इस तरह से 'रंगीला रे तेरे रंग में...' का जन्म हुआ। बर्मन, जिन्हें लोग प्यार से 'दादा' कहा करते थे, उन्हें नीरज के गीत की दिल छू लेने वाली पंक्तियां बहुत पसंद आई थीं।

बर्मन और नीरज की जोड़ी का कमाल 
70 का दशक बर्मन और नीरज की इस जोड़ी के दिये अनेक बेहतरीन गीतों का गवाह बना, जिसमें 'शर्मीली', 'गैम्बलर' और 'तेरे मेरे सपने के' गीत शामिल थे। नीरज बताते हैं कि रोज सवेरे 9 बजे वे बर्मन के ऑफिस पहुंच जाते थे। नीरज कहते हैं कि उनके साथ काम करते हुये वे वक्त को भूल ही जाते थे। वे अपने काम को लेकर बेहद समर्पित थे।
 नीरज बताते हैं कि एसडी बर्मन ने नीरज से शमा, परवाना, शराब, तमन्ना, जानेमन, जान और इश्क जैसे शब्दों का प्रयोग बंद करने को कहा। ऐसे में नीरज ने उन्हें अपने गीतों में बगिया, मधुर, गीतांजलि, माला, धागा जैसे शब्दों का प्रयोग करना शुरू किया। नीरज बताते हैं कि कि बर्मन प्रयोग करने में बेहतरीन थे। जैसे वे अंतरा पहले कर देते थे और मुखड़ा बाद में। साथ ही कई सारे वाद्ययंत्रों का उन्होंने पहली बार हिंदी गानों में प्रयोग किया। एक इंटरव्यू में नीरज यह भी कहते हैं कि सोचिये बिना उनके हमारा संगीत कितना गरीब होता?


जब नीरज ने ही बताई अपने गाने की धुन
नीरज ने प्रसिद्ध संगीत निर्देशक शंकर-जयकिशन के साथ भी काम किया है। 'लिखे जो खत तुझे...' और 'आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं...' जैसे बेहतरीन गाने दिए। जब नीरज ने शंकर-जयकिशन के लिये फिल्म 'मेरा नाम जोकर' (1970) में 'ए भाई जरा देख के चलो...' गाना लिखा तो उन्होंने नीरज से कहा कि इसका म्यूजिक देना तो नामुमकिन है. क्योंकि इसमें कोई मुखड़ा नहीं है। ऐसे में नीरज ने खुद अपनी धुन संगीत निर्देशकों को सुझाई।

आखिरी तक देवानंद नीरज के संपर्क में रहे
पिछली उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के दर्जा भी दिया था। नीरज बताते हैं कि देवानंद भी आखिरी वक्त तक उनके संपर्क में थे। हालांकि नीरज ने एसडी बर्मन के गुजरने और शंकर-जयकिशन के दौर के खत्म होने के बाद फिल्मों के लिये गीत लिखने बंद कर दिए थे। कारण था कि नए संगीतकार नीरज के साथ वैसा सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे थे।

No comments: