
मेरे पिता डॉ. प्रभुनाथ सिंह का निधन 21 अगस्त, 2015 को 82 साल की उम्र में हो गया। उन्होंने बीएचयू से एबीएमएस की डिग्री हासिल करने के बाद उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले में मरदह नामक कस्बे में करीब 40 वर्षों तक लोगों की सेवा की। उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ था, इसलिए आम लोगों का परेशानी समझते थे। उनके लिए ज्यादा पैसा कमाना कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। उन्होंने लोगों से उतनी ही फीस ली, जितनी वो बिना किसी कठिनाई के दे सकते थे। उन्होंने काफी लोगों का बिना पैसे लिए इलाज किया। मैंने उनको लोगों के लिए 24 घंटों में 20 से 22 घंटों तक बिना थके और शिकायत के काम करते देखा। वह कई शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना करते हुए उनके प्रबंधक थे। उनका आरएसएस से जुड़ाव था, लेकिन उनके मित्रों में कांग्रेसी, कम्युनिष्ट, समाजवादी सभी शामिल थे। उनके लिए मानवता की सेवा हमेशा महत्वपूर्ण रही। यही कारण है कि उनका सभी जातियों और समुदायों से जुड़ाव रहा। पिछले दस वर्षों से वह पार्किंसन और अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। बीमारी के दौरान भी उनके काम करने का जज्बा कम नहीं हुआ। यही कारण है कि उनकी मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में लोगों का समूह उमड़ पड़ा और लोगोंं ने उनके काम को याद किय
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