Friday, October 9, 2015

कबीर की निर्वाण स्थली को नहीं मिला रहनुमा

उत्तर प्रदेश में संतकबीरनगर के मगहर में स्थित सन्त कबीर दास के निर्वाण स्थली पर हर साल राजनेता आते हैं और कई वायदे भी कर जाते हैं, लेकिन इसे अब तक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका। इस साल भी मगहर में उनकी जयंती समारोह पूर्वक मनाने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। 

    तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम 2००3 में यहां आए तथा इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की जरूरत बताई तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 2०11 में यहां पहंचे। एक बार फिर कबीर दास का 617वां प्रकटोत्सव कार्यक्रम आगामी दो जून को भव्य रूप से मनाने की तैयारी कर ली गयी है, जिसमें देश विदेश के कबीरपंथी एवं श्रद्धालु जन भाग लेंगे। समारोह में केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा सहित कई देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित किया गया है। जयंती पर बीजक पाठ, यज्ञ, सेवा सत्संग, शोभा यात्रा, गुरुपूजा, भंडारा भजन आदि कार्यक्रम होंगे।
   मगहर स्थित कबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर काफी प्रयास के बाद भी अन्तरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रुप में विकसित नहीं हो पायी है। सदगुरु कबीर समाधि स्थली के महंत विचार दास ने कहा कि 11 अगस्त 2००3 को तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम संत कबीरदास के निर्वाण स्थली मगहर आए थे। उन्होंने मगहर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा था कि कबीर दास के उपदेश पहले से भी अधिक प्रासंगिक और आवश्यक हैं।
     कलाम ने यहां रिसर्च सेंटर पुस्तकालय, संग्रहालय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था कि विश्व शांति के लिए संत कबीर दास के उपदेशों का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार आवश्यक है। श्री कलाम के प्रयास से एक लाख रुपया समाधि स्थल तथा एक लाख रुपया मजार स्थल को विकसित करने के लिए मिला था, उसके बाद अन्य कार्यो के लिए शासन से कोई सहयोग नहीं मिल पाया है।     
    महंत विचार दास ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी 21 जुलाई 2०11 को मगहर आए थे। उन्होंने संत कबीरदास की समाधि और मजार पर मत्था टेकने के बाद मगहर को विकसित कराने का वायदा किया था। समाधि स्थली मानव मात्र की एकता को अभिभूत करने वाला तीर्थ ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कबीर प्रेरणा का केन्द्र भी है। प्रयास यह है कि मगहर को अंतरराष्ट्रीय प्रेरणा स्थल बनाकर हिंदू मुस्लिम की नहीं बल्कि सभी संप्रदाय पंथ या मानव मात्र को एक बिन्दु पर लाने का संकल्प पूरा किया जा सके। कबीरदास का संदेश जन-जन तक पहुंचाने और कबीर साहित्य के प्रकाशन के उद्देश्य से 1993 में प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने संतकबीर शोध संस्थान की स्थापना करायी। 
    मगहर में प्रतिवर्ष तीन बड़े कार्यक्रम होते हैं। हर साल 12-16 जनवरी तक मगहर महोत्सव एवं कबीरमेला का आयोजन किया जाता है, जिसमें संगोष्ठी, परिचर्चा, चित्र एवं पुस्तक प्रदर्शनी के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। माघशुक्ल एकादशी को कबीर निर्वाण दिवस समारोह भी आयोजित किया जाता है। इसके अलावा कबीरमठ द्वारा संगीत, सत्संग एवं साधना, साहित्य प्रचार-प्रसार तथा शोध साहित्य, सदगुरु कबीर बाल मंदिर संत आश्रम एवं गो-सेवा बृद्धाश्रम तथा यात्रियों की आवासीय व्यवस्था जैसी सात प्रमुख गतिविधियां सम्यक रूप से संचालित की जाती है।
हिन्दी का प्रथम रहस्यवादी कवि भी कबीर को माना जाता है। मगहर ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल है। इसे संतकबीर की परिनिर्वाण स्थली होने का गौरव प्राप्त है। यही वह स्थान है जिसे संतकबीर ने प्राचीन मान्यताओं को तोड़कर परिनिर्वाण के लिए वरण किया। ‘‘ क्या काशी क्या ऊसर, मगहर। राम हृदय बस मेरा -जो काशी तन तजे कबीरा रामै कौन निहोरा’’।   
   कबीर दास के निर्वाण के बाद मगहर के तत्कालीन शासक बिजली पठान ने उनकी समाधि का निर्माण कराया और व्यवस्था संचालन के लिये पांच सौ बीघा जमीन भी दी। उस पर खेती की जा रही है और उसकी आमदनी से कबीर का समाधि की व्यवस्था संचालित की जाती है।  समाधि लगभग 32 गुणे 24 फीट का एक चबूतरा है, जिस पर मुख्य समाधि भवन है। संगमरमर के श्वेत पत्थरों से निर्मित है। 
समाधि भवन के मुख्य द्वार के शिलालेख से स्पष्ट है कि इनका जीर्णोद्धार 1896 में आचार्य गुरु प्रसाद साहेब ने कराया था। समाधि के ठीक पीछे जर्जर अवस्था में एक मकान दिखाई पड़ता है, जिसे कबीर की भुई या गुफा कहते हैं। कबीर की साधना स्थली है। भू प्रबंधक के कागजातों के आधार पर मगहर 14०० वर्ष पुराना है तथा इसका क्षेत्रफल 13 वर्ग किलोमीटर है।

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